तेनाली राम की हिंदी कहानिया – उबासी की सजा – Story of Tenali Raman – Story of Yawning

तेनाली राम की हिंदी कहानिया – उबासी की सजाStory of Tenali Raman – Story of Yawning

एक दिन तेनालीराम (tenaliram) को संदेश मिला कि रानी तिरुमलादेवी इस समय बड़े संकट में हैं और आपसे मिलना चाहती हैं । तेनालीराम तुरन्त रानी जी से मिलने गए । ”रानी जी! कैसे याद किया सेवक को ?” ”तेनालीराम जी! हम एक भारी मुसीबत में फंस (Stuck in problem) गए हैं ।”

”मेरे होते आप किसी प्रकार की चिन्ता न करें और मुझे बताएं (tell me) कि क्या बात है ।” दिलासा पाकर रानी की औखें भर आईं । वे बोलीं: ”बात दरअसल ये है कि महाराज (king) हमसे काफी नाराज हैं ।” ”किन्तु क्यों ? क्या हुआ था ?” ”एक दिन वह हमें अपना एक नाटक पढ़कर सुना रहे थे कि हमें उबासी (yawn) आ गई, बस इसी बात पर महाराज नाराज होकर चले गए ।

तब से आज तक कई दिन हो गए हैं, महाराज ने इस तरफ का रुख ही नहीं किया ।  हालांकि इसमें मेरा कोई (not my fault) दोष नहीं था, फिर भी मैंने महाराज से माफी मांगी, पर महाराज पर कोई असर नहीं (no effect)हुआ । अब तो तुम्हीं हमारी इस समस्या को हल (solution of problem) कर सकते हो तेनालीराम ।”

”आप किसी प्रकार की चिन्ता न करें । मैं अपनी ओर से पूरा प्रयास (will try my best) करूँगा ।” महारानी को ढांढस बंधाकर तेनालीराम दरबार (tenaliram gone to darbar) में जा पहुंचे । महाराज स्थ्य रेठे राज्य में चावल की खेती (rice farming) पर मंत्रियों से चर्चा कर रहे थे । ”चावल की उपज बढ़ाना बहुत आवश्यक है ।”

महाराज कह रहे थे: ”हमने बहुत प्रयत्न (tried) किए । हमारे प्रयत्नों से स्थिति में सुधार (no change in situation) तो हुआ है, लेकिन समस्या पूरी तरह सुलझी नहीं है ।” ”महाराज!” तभी तेनालीराम ने चावल के बीजों में से एक-एक बीज उठाकर कहा:  ”यदि इस किस्म का बीज बोया जाए तो इस साल उपज दुगनी-तिगुनी (double or triple) हो सकती है ।”

”अच्छा-क्या इस किस्म का बीज इसी खाद में हो जाएगा ?” ”हां महाराज! किसी प्रकार का और दूसरा प्रयत्न करने की आवश्यकता (no need to trying anything) ही नहीं है किन्तु…।”  ”किन्तु क्या तेनालीराम ।” ”इसे बोने, सींचने और काटने वाला व्यक्ति (a person who never yawns) ऐसा हो जिसे जीवन में कभी उबासी न आई हो और न कभी आए ।”

”तेनालीराम! तुम्हारे जैसा मूर्ख (stupid) मैंने आज तक नहीं देखा ।” महाराज चिढ़ से गए:  ”क्या संसार में ऐसा कोई व्यक्ति (any person) है जिसे कभी उबासी न आई हो ।” ”ओह! क्षमा करें महाराज! मुझे नहीं मालूम था कि उबासी सभी को आती है: मैं ही क्या, महारानी जी भी यही समझती हैं कि उबासीद आना बहुत बड़ा जुर्म है: मैं अभी जाकर महारानी जी (maharani ji) को भी बताता हूं ।”

अब महाराज की समझ (king understand) में पूरी बात आ गई । वे समझ गए कि हमें रास्ते पर लाने के लिए ही तेनालीराम (tenaliram) ने ऐसा कहा है । वे बोले: ”मैं स्वयं जाकर महारानी को बता दूंगा ।” महाराज तुरन्त महल (mahal) में जाकर रानी जी से मिले और उनके सभी शिकवे समाप्त कर दिए ।

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