Childhood of Mahatma Gandhi | गांधीजी के बचपन से जुड़े कुछ मजेदार तथ्य, महात्मा गाँधी का बचपन

Childhood of Mahatma Gandhi | गांधीजी के बचपन से जुड़े कुछ मजेदार तथ्य, महात्मा गाँधी का बचपन

महात्मा गांधी ने देश को आजा़दी का रास्ता दिखाया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गांधी जी के स्कूल के दिन कैसे थे। इसका खुलासा राजकोट के हाई स्कूल में सात वर्षों तक प्रिंसिपल रहे जेएम उपाध्याय की 1965 में एक किताब में किया। जिसमें गांधीजी (Mahatma Gandhi)के विद्यार्थी जीवन के बारे में कई खुलासे किए गए है।

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Mahatma Gandhi Childhood Facts in Hindi :

  1. मोहनदास ने कई स्कूल बदले

Gandhis Childhood – इस किताब में बताया गया है कि 10 वर्ष की उम्र तक आते-आते गांधीजी (Mahatma Gandhi)ने कई स्कूल बदल लिए थे। स्कूल बदलने के अलग-अलग कारण थे। वह बहुत होनहार विद्यार्थी नहीं थे। परीक्षा परिणामों में पर्सेंटेज 45 से 55 के बीच रहता था।

  1. अकसर कम उपस्थिति रहती थी

कक्षा में बालक मोहनदास (Mahatma Gandhi)की उपस्थिति बहुत कम रही। कक्षा तीसरी में वे 238 दिनों में 110 दिन ही स्कूल गए। मतलब वह कम ही स्कूल जाते थे।

  1. दो बार एक ही क्लास में बैठना पड़ा

कम उपस्थिति के कारण मोहनदास (Mahatma Gandhi)को एक साल रिपीट करना पड़ा था इसके बाद ठीक-ठाक पढ़ने के कारण रिजल्ट कुछ बेहतर हो सका जिसके बाद 66.5 % और 8वीं रैंक आई।

  1. स्कूल से अकसर गायब

मिडिल स्कूल में भी उपस्थिति अच्छी नहीं थी। छुट्टी मारने का कारण था पिताजी की तबीयत खराब रहना ।

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  1. बचपन का दोस्त बना बाबू

जूनियर स्कूल में मोहनदास (Mahatma Gandhi)का साथी त्रिभुवन भट्ट अक्सर उनसे बेहतर अंक पाता था। त्रिभुवन एक बाबू बना और उसकी आखिरी नौकरी राजकोट के मुख्यमंत्री के पद पर थी।

  1. हाईस्कूल में गांधीजी (Mahatma Gandhi)का पक्का दोस्त एक मुस्लिम था (चित्र), जबकि हेडमास्टर पारसी। स्कूल की बिल्डिंग जूनागढ़ के नवाब द्वारा दिए गए 63,000 रु. से बनी थी और इस तरह के विभिन्न धर्मों के प्रभाव में गांधीजी बड़े हुए और उन पर इसका प्रभाव आजीवन रहा।
  1. गांधीजी (Mahatma Gandhi)का भाई करसन उनसे दो कक्षा आगे था मगर दो बार फेल हुआ। एक समय गांधी और करसन एक ही कक्षा में आ गए थे।
  1. गांधीजी (Mahatma Gandhi) को चरित्र प्रमाणपत्र में ‘वेरी गुड’ मिलता था जबकि अन्य विद्यार्थी ‘गुड’ से ऊपर नहीं पहुंच पाते थे।
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