Gomutra Benefits in Hindi | गोमूत्र से बीमारियों में होने वाले लाभ

Gomutra Benefits in Hindi | गोमूत्र से बीमारियों में होने वाले लाभ

क्या आप जानते है की गौमूत्र से क्या लाभ होते है? गौमूत्र कौन सी बिमारियों में काम आता हैं? आखिर गौमूत्र के क्या फायदे हैं? इन्ही सब सवालों के जवाब जानते है हमारी आज की इस पोस्ट में…

वौदिक ग्रंथों में गाय की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई है गाय से मिलने वाले फायदे क्या हैं और आप कैसे अपने जीवन को स्वस्थ रख सकते हैं। यह अब वैज्ञानिक तौर पर भी सिद्ध किया जा चुका है की गाय का मूत्र कीटाणुनाशक है जो शरीर में विभ्भिन बीमारियों को दूर करने में सहायक है। गोमूत्र  (gomutra) में कार्बोलिक एसिड, यूरिया, फाॅस्फेट, यूरिक एसिड, पोटैशियम और सोडियम होता है । जब गाय का दूध देने वाला महिना होता है तब उस के मूत्र में लेक्टोजन रहता है, जो ह्दय और मस्तिष्क के विकारों के लिए फायदेमंद होता है। गाय के मूत्र का उपयोग विभिन्न रोगों में कैसे किया जा सकता है आपको बताते हैं |

(पाठकगण एक बात का विशेष ध्यान रखे की गौमूत्र भी उसी गाय का लाभकारी है जिसे शुद्ध प्राकृतिक भोजन दिया जाता है तथा जिसे दूध बढाने के लिए जहरीले इंजेक्शन नहीं दिए जाते)

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Gomutra Health Benefits in Hindi :

  1. गौमूत्र में वात और कफ के सभी रोगों को पूरी तरह खत्म करने की शक्ति है। पित्त के रोगों को भी गौमूत्र खत्म करता है लेकिन कुछ औषधियों के साथ ।
  1. वात, पित्त और कफ के कुल 148 रोग हैं। भारत में इन 148 रोगों को अकेले खत्म करने की क्षमता यदि किसी वस्तु में है तो वो है देशी गाय का गौमूत्र । गोमूत्र (gomutra) वात, पित्त, कफ तीनों की सम अवस्था में लाने के लिए सबसे ज्यादा मदद करता है ।
  1. आधा कप गोमूत्र (gomutra) सुबह खाना खाने के एक घंटे पहले बवासीर/बादी और खूनी, फिस्टुला, भगन्दर, अर्थराइटिस, जोड़ों का दर्द, उक्त रक्त दबाव, हृदयघात, कैंसर आदि ठीक करने के लिए लें ।
  1. गौमूत्र (gomutra) में वही 18 सूक्ष्म पोषक तत्व हैं जो कि मिट्टी में होते हैं। ऐसा वैज्ञानिकों का परीक्षण कहता है। भारत में cDRI लखनऊ, वैज्ञानिकों की दवाओं पर काम करने वाली सबसे बड़ी संस्था है। शरीर की बीमारियों को ठीक करने के लिए शरीर को जितने घटक चाहिए तो सब गौमूत्र में उपलब्ध हैं जैसे-सल्फर की कमी से शरीर में त्वचा के रोग होते हैं।
  1. गौमूत्र पीने से त्वचा के सभी रोग ठीक होते हैं, जैसे-सोराइसिस, एक्जिमा, खुजली, खाज, दाल जैसे सब तरह के त्वचा रोग ठीक होते हैं। गौमूत्र (gomutra) से हड्डियों के रोग भी ठीक होते हैं। गौमूत्र से खाँसी, सर्दी, जुकाम, दमा, टी.वी., अस्थमा जैसी सब बीमारियाँ ठीक होती हैं। गोमूत्र (gomutra) से ठीक हुई टी.वी. दुबारा उस शरीर में नहीं आती है। गोमूत्र (gomutra) से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति इतनी अधिक बढ़ जाती है कि इससे बीमारियाँ शरीर में प्रवेश नहीं कर पाती हैं।
  1. टी.वी. की बीमारी में डाट्स की गोलियों का असर गौमूत्र के साथ 20 गुना बढ़ जाती है अर्थातृ सिर्फ गौमूत्र (gomutra) पीने से टी.वी. 3 से 6 महीने में ठीक होती है, सिर्फ डाट्स की गोलिशाँ खाने से टी.वी. 9 महीने में ठीक होती है और डाट्स की गोलियाँ और गौमूत्र साथ-साथ देने पर टी.वी. 2 से 3 महीने में ठीक हो जाती है।
  1. गौमूत्र (gomutra) का असर गले के कैंसर पर आहार नली के कैंसर पर पेट के कैंसर पर बहुत ही अच्छा है। गौमूत्र (gomutra) के असर को कैंसर के केस में अध्ययन/प्रयोग के लिए बलसाड (गुजरात) में एक बहुत बड़ा अस्पताल बन रहा है। जिसे कुछ जैन समाज के लोगों ने बनवाया है।
  1. शरीर में जब करक्यूमिन नाम के तत्व की कमी होती है। तभी शरीर में कैंसर का रोग आता है। गौमूत्र (gomutra) में यही करक्यूमिन भरपूर मात्रा में है और पीने के तुरन्त बाद पचने वाला है। जिससे कि तुरंत असरकारक हो जाता है।

दवा के प्रति अच्छी भावना नहीं होने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता उस दवा को पचाने में कम हो जाती है इसलिए दवाओं को हमेशा सकारात्मक भाव से ही ग्रहण करना चाहिए।

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  1. हरड़े पानी में घिस कर देने पर कम लाभ करती है और गौमूत्र में घिस कर देने पर अधिक लाभ करती है।
  1. गौमूत्र (gomutra) हमेशा सुबह को ही लेना चाहिए। बहुत बीमार व्यक्ति को 100 ग्राम पीना चाहिए। इसे आधा-आधा करके भी ले सकते हैं। खाली पेट यानी सुबह-सुबह, कुछ भी खाने से 1 घंटे पहले जो बीमार हैं वह दिन में दो बार भी ले सकते हैं और स्वस्थ लोगों को सिर्फ सुबह ही लेना चाहिए। स्वस्थ लोगों को 50 ग्राम से ज्यादा नहीं पीना चाहिए। बँधी हुई गाय का मूत्र उतना उपयोगी नहीं है। जर्सी गाय के मूत्र में सिर्फ तीन पोषक तत्व होते हैं।
  1. आँख के सभी रोग कफ के हैं और आँख के कोई रोग जैसे मोतियाबिंद (कैटरेक्टर), ग्लुकोमा, रैटिनल डिटैचमेन्ट (इसका दुनिया में कोई इलाज नहीं है यहाँ तक कि ऑपरेशन भी नहीं है) । इसके साथ ऑखों की सभी छोटी-छोटी बीमारियाँ जैसे आँखों का लाल होना, आँखों से पानी निकलना, आँखों में जलन होना, ये सभी छोटी-बड़ी बीमारियाँ गौमूत्र से ठीक होती हैं।

मतलब पूरी तरह से ठीक होती हैं। गौमूत्र सूती कपड़े के आठ परत से छानकर 1-1 बूंद आँखों में डालना है। आँखों के चश्मे 6 महीने में उतर जायेंगे। ग्लुकोमा बिना ऑपरेशन ठीक होता है-4 सवा चार महीने में, कैटरक्त-6 सा 6 महीने में ठीक हो जाता है। रेटिनल डिटैचमेन्ट को एक साल लगता है।

  1. 1-1 बूंद रोज सुबह-सुबह डालना है और 3 से 4 दिनों में बीमारी ठीक हो जायेगी। बच्चे जिनकी पसलियाँ कफ की वजह से परेशान कतरी हैं, एक चम्मच गौमूत्र पीला दें तुरंत आराम मिलना शुरू हो जायेगा। ऐसा बड़े लोग भी कर सकते हैं मात्रा आधा कप बढ़ाकर ।
  1. मूत्र पिण्ड के सभी रोग जैसे किडनी फेल होने के और किडनी के दूसरी तकलीफों के लिए गौमूत्र 1/2 कप रोज सुबह खाली पेट लें।
  1. पेशाब से संबंधित किसी भी रोग (लगभग 22 से 28 रोग) में गौमूत्र 1/2 कप रोज सुबह खाली पेट लें।
  1. कब्जीयत की बीमारी में 1/2 कप गौमूत्र 3 से 4 दिन सुबह-सुबह खाली पेट पियें, बिल्कुल ठीक हो जायेगी।
  1. पित्त के सभी रोगों के लिए गौमूत्र जब भी पियें, उन समयों में घी (देशी गाय का) का सेवन खाने में अधिक करें। पित्त के रोगी गौमूत्र का इस्तेमाल पानी बराबर मात्रा में मिलाकर करें जैसे एसिडिटी, हाईपर एसिडिटी, अल्सर, पेप्टिक अल्सर, पेट में घाव हो गया आदि के लिए।
  1. गौमूत्र (gomutra) की मालिश करने से त्वचा के सफेद धब्बे सब चले जायेंगे। खाज, खुजली एग्जिमा थोड़ा गौमूत्र रोज मालिश करें सब ठीक हो जायेगा।
  1. आँखों के नीचे काले धब्बे हैं। गौमूत्र रोज सुबह-सुबह लगाएं, काले धब्बे चले जायेंगे। गौमूत्र नहीं मिले तो गौमूत्र का अर्क ले सकते हैं। अर्क 1 चम्मच से अधिक नहीं लेना चाहिए। अर्क को ऑख में डालने के लिए प्रयोग न करें।
  2. कैंसर ठीक करने वाला तत्व करक्युमिन हल्दी के साथ-साथ गौमूत्र में भी भरपूर मात्रा में होता है। गौमूत्र ताजा पीना चाहिए, 48 मिनट के अन्दर गौमूत्र बोतल में भरकर 4-5 दिन तक रख सकते हैं। बोतल काँच का होना चाहिए।
  1. गाय जो साफ-सुथरे वातावरण में रहती हो, अच्छा चारा खाती हो और नियमितन रूप से घुमने के लिए जाती है, उसका मूत्र जरूर पियें वो सबसे ज्यादा लाभकारी होगा। यदि ऐसी गाय का अभाव हो तो बिना संकोच के किसी भी देशी गाय का गौमूत्र ले लें। ऐसा मूत्र नुकसान नहीं करेगा जब भी कुछ करेगा फायदा ही करेगा।

अब तक के सारे शोध यही बताते हैं कि देशी गाय के गौमूत्र का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। गौमूत्र अधिक पी लेने पर पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाता है। अर्थात् किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुँचता है। इसमें सिर्फ इतनी बात ध्यान में रखनी है कि गाय देशी हो और गाय गर्भवती न हो, गाय बीमार न हो ।

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  1. गौमूत्र (gomutra) में गेंदे के फूल की चटनी बनाकर उबालकर थोड़ा हल्दी डालकर कैंसर के केस में बहुत ही तेजी से लाभ मिलता है।
  1. हैपेटाइटिस परिवार (A, B, c, D, E, F) की बीमारियाँ जिसे ज्चाइन्डिस के नाम से या पीलिया के नाम से हम जानते हैं, ये सारी बीमारियाँ गौमूत्र से ठीक होती हैं।
  1. वात और कफ के रोगी बिना कुछ मिलाये गौमूत्र का सेवन कर सकते हैं जैसे दमा, अस्थमा, सर्दी, खांसी आदि।
  1. 18 वर्ष से अधिक की स्थिति में गौमूत्र की मात्रा 1/2 कप (50 ग्राम) और 18 वर्ष से अधिक की स्थिति में 25 ग्राम। गौमूत्र पीने का सर्वोत्तम समय सुबह-सुबह निराआहार अर्थात् खाली पेट, कुछ भी खाने के 1 घंटे पहले । जो बीमारी जितने समय में आती है, उतने समय में ही जाती है। अतः लंबी और गंभीर बीमारियों की स्थिति में गौमूत्र कम से कम 3 महीना लेना चाहिए और छोटी बीमारियों की स्थिति में 2 हफ्ते से 1 महीने तक गौमूत्र लेना चाहिए।
  1. सर्दी, खाँसी, जुकाम, डायरिया डिसेन्ट्री, कान्स्टीपेशन जैसी बीमारियाँ 2-3 दिन में मिट जाती हैं। 8 महीने से अधिक लेने की स्थिति में हर 8 महीने के बाद 15 दिन से 20 दिन का अन्तर रखना आवश्यक है। ऐसा इसलिए करना चाहिए कि भविष्य में इसकी आदत न लगे ।
  1. गोबर और गौमूत्र का उपयोग दोनों तरह से अच्छा होता है, आन्तरिक और बाहरी । बाहरी स्थिति में दाद, खाज, खुजली, दाग, धब्बे आदि की स्थिति में, गौमूत्र लगाने के बाद 10 से 15 मिनट सूर्य की रोशनी में छोड़ने के बाद धो देना चाहिए।
  1. गाय का मूत्र जीवराशि रहित है इसलिए जैन लोग भी इसका सेवन कर सकते हैं। जैने लोग गौमूत्र के स्थान पर गौ अर्क का उपभोग कर सकते हैं। जैन लोग गोबर का इस्तेमाल न करें। गौमूत्र अर्क का सेवन 1 चम्मच से 2 चम्मच करें। चाहें तो 1/2 कप गुनगने पानी में मिलाकर भी ले सकते हैं। गौमूत्र यदि 2-3 दिन पुराना है तो उसमें जरूर पानी मिलायें।

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